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| Tags: | हिन्दी कविताएँ : जीवन का सत्य मिलेगा आपको यहाँ ! |
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प्रसन्नता ( HAPPINESS ) " जो दुःख हर दूसरों का जीता, वही मनुज आते है याद मृत्युपरांत, आत्मा उनकी इस लोक भी-उस लोक भी, कर परमार्थ हो क्लांत, अगर सागर मंथन से मिला पियूष पात्र, मोहिनी बने नारायण को, आँचल में सागर के गरल भी था, शिव ने पिया विश्व कष्ट...
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सुनो क्या याद है तुम्हे पहली मुलाकात पलकें झुकाए दबी दबी हँसी छलकने को बेताब वो अल्हड़ लम्हे भीगा एहसास हाथों में हाथ लिए घंटों ठहरा वक़्त उनिंदी रातें कहने को अनगिनत बातें दिल की बंज़र ज़मीन पर नाख़ून से बने कुछ निशान कोरे केनवस पर खिंची आडी तिरछी...
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क्या दौलत की खातिर ही, इन्सान जहाँ में आता है?? सकल कमी जोड़ते-जोड़ते, आखिर एक दिन मर जाता है. क्या मिलता है उसे यहाँ पर, छोड़ यही तो जाता है. तो फिर काहे जीवन भर, वह...
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दिल चाहता है.. एक बार फिर छोटा बच्चा बन जाऊ, एक बार फिर वैसे ही स्कूल जाऊ. . . . . . ओर . . . . .. फिर वही अपनी पुरानी शरारतें दोहराऊ.. वैसे ही रोज सुबह छुट्टी के बहाने बनाऊ और जब स्कूल जाऊ तो प्रार्थना में आंखे खोलकर ग़ाऊ, वो क्लास में बैठकर...
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तुम जानना चाहती थी न ! कि-मेरी क्या हो तुम? तो सुनो- मुझमे समाहित प्रेम का,कोमल एहसास हो तुम. मेरी प्रेरणा,मेरा विश्वास,मेरा आधार हो तुम. मेरी प्राण,मेरी आत्मा,मेरा दिलो-दिमाग हो तुम. मेरे वक्तित्व का प्रारूप,मेरी पहचान हो तुम. मेरी नस-नस मेरी रग-रग...
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हे माँ! तेरा वो सलोना रूप, मै एक बार फिर से पाना चाहती हूँ. जो न जाने कहाँ खो गया है? मै एक बार फिर से तेरी क्रोड़ में बैठ, जीवन की दुविधाओ से दूर होकर, खुशियों के वैभव को पाना चाहती हूँ; जो तेरे स्नेह में लिप्त हुआ है. मै एक बार फिर से रोकर चुप होना...
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हर तरफ चर्चो का बाज़ार गर्म है, की-बेनकाब होते हुए भी ना उन्हें शर्म है. जो आज तक देते रहे हैं सच की दुहाई, वो आज लोलुपतावश उसे ना माने खुदाई. एक लडकी की अस्मिता को खतरे में डालकर...
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प्यार में अक्सर ये होता है, दिल कभी रोता,कभी हसंता है. क्या कहे इसमें ,क्या होता है . कोई पाता है,कोई खोता है . किससे होता है,क्यों होता है? ये पता नही कभी चलता है. जिससे होता है,वो...
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तुम मेरे क्या हो,ये मै कह नही सकती, पति,अच्छे दोस्त या उससे बडकर, कल्पना जो किया था हकीकत में पाया था , तुम्हे पाकर मेरा रोम-रोम मुस्कुराया था. मै जिद्दी थी हठी थी,पाषाड़ सी -बनी थी, पर तेरे स्नेह की गर्मी से मोम-सी पिघली थी. तुमने मुझे मेरे होने का...
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