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last activity : 07 06 2010 20:18:04 +0000
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हर्फ़ अधूरे है , पैगाम मुकम्मल है ?????????????
जहा सोच की परिक्वता को न देखा जाये ,
पहनावा ही व्यक्तित्व का आईना कहलाये ,
अन्यथा
अस्तित्व को ही नकारा जाये !
वह बसता नहीं भारत मेरा ..........
जहा कर्मछेत्र में पहला हो भ्रस्ठाचार ,
रिश्तो में फैली हो कड़वाहट ,
इन्सान बना हो रक्षक से भक्षक ,
आत्मा की आवाज को न सुना जाये जहा ,
वहा बसता नहीं भारत मेरा .........
जहा शमशानों में बसता हो जीवन ,
बर्बरता की हद से ज्यादा ,
फैली हो वहशियत जहाँ में ,
इंसानियत का होता हो खून हर रोज जहा ,
वह बसता नहीं भारत मेरा ............
जहा जज्बातों की कदर न हो ,
व्यवहारिक जीवन सब जीते हो ,
ऊंच - नीच का भेद ही करके ,
इंसानों को बाटा जाये जहा ,
वह बसता नहीं भारत मेरा ............
जहा काला - धंधा सरेआम होता रहे ,
न्याय का फंदा हररोज झूलता रहे फासी पर ,
झूठ बैठा हो शहनशाह बनकर महलों में ,
सच्चाई बैठी हो ठुकराने पर झोपडी में ,
वह बसता नहीं भारत मेरा .............
जहा गरु को चाहना हो गरु - दक्षिणा की ,
शिष्य को न शिक्षा मिलती हो ,
भूखे को न भोजन मिलता हो ,
गरीब को न वस्त्र मिलता हो ,
वह बसता नहीं भारत मेरा .............
विश्व में फेला कर चेतना सवं चेतनाहीन हो गया है ,
अहिंषा का पुजारी हिंसात्मक हो गया है ,
पापाचार की गहराई मापी न जाती हो जहा ,
वह बसता नहीं भारत मेरा .............
जहा रिश्तो में गर्माहट न हो ,
अपनत्व ही बोझ बना हो ,
जो अपनी ही पहचान की खोज में ,
चलता हो पीछे दुनिया के ,
वह बसता नहीं भारत मेरा .............
वह बसता नहीं भारत मेरा .............

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वो कहते है हम से जरा कम हँसा करो हसीना ! कही तुम्हारी हँसी की खनक से सीसे न टूट जाए मेरे घर के ! हम ने भी उसी अंदाज में ज़रा नज़ाकत से कहा ------- इतना डरते है हमारी हँसी से तो लोहे का बनवालो घर को , हमारे आसुओ की तपिस से वो भी पिघल जाये गा ! |
Bahut khub............... |
Its realy fantastic song n very close to my heart............... |