| Topic : politics of india |
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Primetime News
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Source : http://in.jagran.yahoo.com
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last activity : 09 08 2011 03:30:57 +0000
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INDIA-BANGLADESH TIES AND MANMOHAN'S DHAKA VISITप्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आगामी बांग्लादेश यात्रा से दो ऐसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति उभरने की उम्मीद की जा रही है, जो एक लंबे अर्से से समाधान का इंतजार कर रहे थे। ये मुद्दे हैं सीमा का निर्धारण और नदी जल का बंटवारा। इसके अतिरिक्त नई दिल्ली और ढाका का यह संपर्क नेपाल और भूटान को मिलाकर एक दक्षिण एशियाई स्वर्णिम चतुर्भुज स्थापित करने की प्रक्रिया को भी गति प्रदान कर सकता है। उम्मीद यह की जा रही है कि इन चार देशों के बीच दीर्घावधि का नजदीकी सहयोग कायम होने से जल संसाधनों और ऊर्जा के बंटवारे में सहूलियत कायम होगी और उनके बीच परस्पर संपर्क भी बढ़ेगा। भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध नया और निर्णायक आकार ले रहे हैं और यह सब इतनी तेजी से हो रहा है कि उसके साथ कदमताल मिला कठिन सिद्ध हो रहा है। दोनों पड़ोसी देश 2014 में आम चुनाव का सामना करने से पहले अपने आपको मजबूत बनाने की जल्दबाजी में दिखाई दे रहे हैं। दोनों देशों के नेताओं के परस्पर दौरों के राजनीतिक पहलू की ओर संकेत करते हुए एक वरिष्ठ राजनयिक कहते हैं कि सहयोग करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमें सहयोग करते हुए दिखना भी जरूरी है। इस राजनयिक की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह बांग्लादेश के साथ बातचीत की प्रक्रिया में शामिल हैं। वह आगे कहते हैं कि अफगानिस्तान और म्यांमार के साथ सहयोग करते हुए दिखना भले ही भारत को जरूरी न लगे, लेकिन बांग्लादेश के मामले में ऐसा नहीं है। सीमा संबंधी समझौते से न केवल भारत का नक्शा बदलेगा, बल्कि यह किसी भी पड़ोसी के साथ भारत का पहला सीमा विवाद समाधान भी होगा। जाहिर है, इससे 1947 में अंग्रेजों द्वारा उपमहाद्वीप छोड़ने के समय से सीमा पर छाई विवादों की धुंध कुछ छंटेगी। इस समझौते के तहत एक-दूसरे के कब्जे वाले क्षेत्रों के संदर्भ में यथास्थिति को औपचारिक मान्यता दी जाएगी। साफ है कि क्षेत्र और लोगों का कोई स्थानांतरण नहीं होगा। पहली बार ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की गणना की गई है और उनकी संख्या 53000 पाई गई है। इन लोगों को उस देश की नागरिकता मिलेगी जहां वे रह रहे होंगे। यदि वे बाद में अपनी नागरिकता बदलना चाहें तो उन्हें सामान्य प्रक्रिया के तहत ऐसा करने की अनुमति मिलेगी। पिछले छह दशकों से यह एक बड़ी मानवीय समस्या रही है। दोनों सरकारों की ओर से जो संयुक्त सर्वेक्षण कराए गए उनमें सामने आया कि दोनों देशों के लोगों ने आपस में शादियां तक कर ली हैं। अब यदि विशिष्ट क्षेत्र समाप्त हो जाते हैं और बहुमत वाले समुदाय के आधार पर उनका निर्धारण कर दिया जाता है तो ऐसे युगलों से जन्मे बच्चों की वैधानिक स्थिति क्या होगी? यह और ऐसे ही अन्य मसलों पर तत्काल प्रभाव से ध्यान देने की आवश्यकता है। समाधान इसलिए मुश्किल नहीं होना चाहिए, क्योंकि नई दिल्ली, ढाका और यहां तक कि कोलकाता में मैत्रीपूर्ण सरकारों की मौजूदगी में राजनीतिक माहौल अनुकूल है। प्रधानमंत्री की यात्रा दक्षिण एशिया, विशेषकर उसके पूर्वी भाग में क्षेत्रीय एकता की संभावनाओं को भी विस्तार देगी। बांग्लादेश चाहता है कि ढाका-कोलकाता रेल सेवा को दिल्ली और अजमेर समेत अन्य भारतीय शहरों तक विस्तार दिया जाए। दरअसल ढाका की इच्छा यह है कि उसका संपर्क केवल कोलकाता तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे भारत से हो। बांग्लादेश के साथ भारत के संपर्को के मामले में पश्चिम बंगाल की निश्चित ही विशेष भूमिका है, क्योंकि यह न केवल बांग्लादेश से लगा है, बल्कि दोनों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी हंै। दूसरे शब्दों में कहें तो भारत के बांग्लादेश के साथ संबंध एक हद तक पश्चिम बंगाल पर निर्भर हैं। उम्मीद है कि मनमोहन सिंह के साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी ढाका जाएंगी। ममता बनर्जी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना अनेक मुद्दों पर अनवरत संपर्क में हैं। भारत ढाका-कोलकाता रेल सेवा के अतिरिक्त त्रिपुरा को बांग्लादेश से जोड़ने की पहल कर रहा है। इसके अतिरिक्त नई दिल्ली की योजना अपने रेलवे नेटवर्क को भूटान और नेपाल तक ले जाने की है। नई दिल्ली ने यह योजना इसलिए बनाई है, क्योंकि चीन ने तिब्बत को अपनी राजधानी बीजिंग से रेल संपर्क के जरिये जोड़ दिया है। भारत और बांग्लादेश की करीब 300 छोटी-बड़ी नदियों पर साझेदारी है, जिनमें 50 प्रमुख रिवर सिस्टम शामिल हैं। इनमें से दोनों देशों के बीच सिर्फ गंगा पर समझौता है। माना जा रहा है कि दोनों देश तीस्ता पर समझौते के लिए तैयार हो गए हैं। इसके अतिरिक्त व्यापार के मोर्चे पर भारत की ओर से बांग्लादेश को कुछ रियायतें देने के संकेत हैं ताकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक असंतुलन को कुछ कम किया जा सके। फिलहाल यह व्यापार पांच गुना भारत के पक्ष में है। इन मुद्दों पर कुछ समय पहले विदेश मंत्री एसएम कृष्णा और विदेश सचिव निरुपमा राव ने अपने-अपने बांग्लादेशी समकक्षों के साथ बैठक में विचार किया था। आर्थिक सहयोग के मुद्दे पर भारत और बांग्लादेश ने 17 परियोजनाएं चिह्नित की हैं। बांग्लादेश ने 61 वस्तुओं को नकारात्मक सूची सेहटाने का आग्रह किया है। (लेखक सामरिक मामलों के विशेषज्ञ हैं)
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