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last activity : 06 07 2012 19:30:30 +0000
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कल टीवी पर कहानी फिल्म आ रही थी शुरू से पता नहीं चला था तो बीच से देखने लगा फिल्म का थोडा सा पता था की शायद ये जो विद्या बालन का चरित्र है विद्या बागची का वो अपने साथी को ढूढने जाता है तो फिल्म पकड़ में आ गयी की क्या चल रहा है फिर ऐसा लगा जैसे देख चूका हु ये फिल्म कही पर और जब तक कहानी का अंत आया और विद्या बालन ने जिस तरह से कातिल को मारा लगा अरे ये तो कही देखा है और याद आ गया मुझे एंजलीना जोली की फिल्म साल्ट का सीन । जिसमे वो बिलकुल उसी तरह से लास्ट में कातिल को मारती है फिर शुरू की कहानी भी एक इंग्लिश फिल्म की तरह लगी। और न जाने कितनी फिल्में मैं देख चूका हु जहा सिर्फ और सिर्फ नक़ल है बाहार की फिल्मो की । क्यों प्रेमचंद और रबिन्द्रनाथ टैगोर का साहित्य कम पड़ गया है जो नक़ल करनी पड़े हमें? क्या कालीदास की रचनाओं में फिल्मकारों को रस नज़र नहीं आता। या हम लोग रचनात्मकता का खाली मुलम्मा ओडे हुए हैं पर वास्तव में कुछ नहीं? बड़ी हैरानी होती है ये देखकर की दुनिया की दुसरे नंबर की फिल्म इंडस्ट्री में रचनात्मकता की इतनी कमी है। कहानिया और पात्र चुराई जाते हैं की हमने इससे सीख ली इंस्पायर हो गए हम और ठीक वैसा ही पात्र हमने चुरा लिया पूरा । जैसे उदहारण के तौर पर रा-वण का जी-वन । हैरानी तो तब हुई जब ये देखा की जी-वन नाम की पूरी फिल्म मौजूद है और उसकी कहानी कमोबेश उसी तरह की है जिस तरह की रा-वन की । हाँ अब उसमे और कई कहानियो का मिश्रण भी मिल जाए तो कोई बड़ी बात नहीं। बहुत हैं इस तरह की पूरी पूरी फिल्म जो ली गयी हैं बहार की फिल्मो से। जैसे ब्रूस अलमाइटी गोड का हिंदी रूपांतरण मौजूद है। और यहाँ शी इस द मैन का हिंदी रूपांतरण भी है । क्या इसी तरह बहार की फिल्मो का हिंदी रूपांतरण करकर यहाँ परोसा जाता रहेगा तो फिर भारतीय दर्शक उसकी मूल प्रति ही क्यों न देख ले ?

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Navratri are beginning today. As well as the new year. Happy Navratri New Year and Blessing to you all. As mentioned there are nine forms of Goddess Durga. Shailaputree is the first. The number nine is very special. Planet also has nine and nine... |