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last activity : 07 06 2010 20:18:04 +0000
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मुझ में अब कोई नहीं रहता तुम भी नहीं......
पर ये ख़ालीपन जो तुम छोड़ गयी हो मुझ से अलग नहीं होता !
कल फिर मैने चाँद को देखा था छत से अपनी
सोचा था कुछ देर रो लूँगा ....सोचा तुम इतनी दूर भी नहीं की दर्द मेरा न पहुँचे तुम तक
पर पता नहीं क्यों तुमने मुझे नहीं पहचाना ....
आजकल समय और मैं ही एक दूसरे को पहचानते हैं अच्छी तरह से.....
वो अक्सर मेरे पास से गुजरता है निशब्द
पर मुझे लगता है कि जैसे उसने मुझ से कहा -अरे! तुम यहीं हो?
इस गतिमान जग में जड़ता की परिभाषा बनकर रह गए हो
तभी तो हवा मुझे नहीं उड़ाती , धूप मुझे नहीं तपाती
छाँव संग नहीं ले जाती ......पानी भी तो नहीं बहता आँखों से अब मेरी....
तुम्हारे लौट आने कि चाह दफ़न है जिस किताब के पन्नों में.... शब्द उसके धुल चुके हैं!
और जो उल्टी रखी हुई है छाती पर अब भी मेरे......पर नींद है कि नहीं आती..कभी नहीं आती ...जाने क्यों ?
बहुत से नये शब्द बुन लिए हैं खुद से ....इन्हीं को उड़ेल कर देखूँ अपने ख़ालीपन में
पर मुझे ऐसा क्यों लगने लगा है ....कि तुम फिर से मेरे भीतर आ रहे हो चुपके चुपके ....................
क्योंकि शायद मैं तुम्हे कभी भूला ही नहीं....जाने क्यों ?
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Its Too Gud.... |
Too good man.....nice to read.... |
मुझे तो मर ही जाना होता है,पर मैं अमर रहता हूँ। कोई समझ पाए या नहीं मेरे प्रेम की कीमत,पर होती वो मेरी जान के बराबर है। मैं एक छोटा सा पतंगा ये जानते हुए कि कभी भी कहीं से एक लौ के वार से मैं अपनी साँसें खो दूँगा। मैं चल पड़ता हूँ पागलों की तरह... |
