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Activity:  1 comments  285 views  last activity : 07 06 2010 20:18:04 +0000
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सुनो क्या याद है तुम्हे
पहली मुलाकात
पलकें झुकाए
दबी दबी हँसी
छलकने को बेताब

वो अल्हड़ लम्हे
भीगा एहसास
हाथों में हाथ लिए
घंटों ठहरा वक़्त
उनिंदी रातें
कहने को
अनगिनत बातें

दिल की बंज़र ज़मीन पर
नाख़ून से बने कुछ निशान
कोरे केनवस पर खिंची
आडी तिरछी रेखाओं के ज़ख़्म

आज भी ताज़ा है नमी
खून से रिसति लकीरों में
जिंदा है तेरे हाथों की खुश्बू
धमनियों में दौड़ते खून में

तेरी यादें मकसद हैं
मेरे जीने की चाह का
तेरा एहसास उर्जा है
मेरी साँसों के प्रवाह का

 
1 comments on "पहली मुलाकात "
  Commented by  Vivek Singh, Project Manager, L&T    | 07 08 2010 13:29:35 +0000
Rating : +1 
बन्जर ज़मीन पर नाखूनो से बनी रेखाओ का आज तक रिसते रहना….. वाह!  पसीज ही डालोगे.
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