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last activity : 07 06 2010 20:18:04 +0000
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मै ख्याल हु तुम्हारा ,
मै हकीक़त हु तुम्हारी ,
देख लो छवि तुम अपनी ,
आईना मुझे अपना समझकर !
मै साया हु तुम्हारी ,
मै खवाब हु तुम्हारा ,
देख लो सच्चाई तुम अपनी ,
आईना मुझे अपना समझकर !
मै आरजू हु तुम्हारी ,
मै जिन्दगी हु तुम्हारी ,
देख लो सच्चाई तुम अपनी ,
आईना मुझे अपना समझकर !
मै खुशबू हु तुम्हारी ,
मै सादगी हु तुम्हारी ,
देख लो व्यक्तितव तुम अपना ,
आईना मुझे अपना समझकर !
मै बीता कल हु तुम्हारा ,
मै वर्तमान हु तुम्हारा ,
देख लो भाविस्षा तुम अपना ,
आईना मुझे अपना समझकर !
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वो कहते है हम से जरा कम हँसा करो हसीना ! कही तुम्हारी हँसी की खनक से सीसे न टूट जाए मेरे घर के ! हम ने भी उसी अंदाज में ज़रा नज़ाकत से कहा ------- इतना डरते है हमारी हँसी से तो लोहे का बनवालो घर को , हमारे आसुओ की तपिस से वो भी पिघल जाये गा ! |
Bahut khub............... |
Its realy fantastic song n very close to my heart............... |
मंजू जी, आपकी सुंदर भावनाऑं की गहन अनुभूति में बाधा आ रही थी इसलिए आपकी कविता में हाथ लगाने की धृष्टता कर रहा हूँ. आशा है आस्वादन में अब और अधिक आनन्द आयेगा. धन्यवाद. मैं ख्याल हूँ तुम्हारा, मैं हकीक़त हूँ तुम्हारी, देख लो छवि तुम अपनी, आईना मुझे अपना समझकर! मैं साया हूँ तुम्हारा, मैं खवाब हूँ तुम्हारा, देख लो सच्चाई तुम अपनी, आईना मुझे अपना समझकर! मैं आरजू हूँ तुम्हारी, मैं जिन्दगी हूँ तुम्हारी, देख लो सच्चाई तुम अपनी, आईना मुझे अपना समझकर! मैं खुशबू हूँ तुम्हारी, मैं सादगी हूँ तुम्हारी, देख लो व्यक्तित्व तुम अपना, आईना मुझे अपना समझकर! मैं बीता कल हूँ तुम्हारा, मैं वर्तमान हूँ तुम्हारा, देख लो भविष्य तुम अपना, आईना मुझे अपना समझकर!